बिषय : खुल्ला पत्र ..
महाशय,
आप लोगों को अच्छी तरह से ज्ञात है कि हिंदी भाषा हि सिर्फ ऐसी भाषा है, जो समूचे 22 जिले के मधेश, मधेश पहाड़ एवं नेपाल भारत को जोड़ती हुई सभी का साझी भाषा है एवं हिंदी भाषा हि नेपाल भारत के बिच परापुर्व से हि रिस्ता रोटी बेटी रोजगार कि भी भाषा रही है एवं हिंदी भाषा आज दुनियां के मानचित्र पर तिशरी भाषा बनते हुए दुनियां में प्रथम भाषा बनने के क्रम में भी है।
मधेश एवं अपनी देश में करीब 132 भाषा बोली जाती है परन्तु सिर्फ हिंदी भाषा हि ऐसी भाषा जो हम सभी नेपाली नागरिकों को जोड़ती है बल्कि खस गोरखा कथित नेपाली भाषा के बिल्कुल समकक्ष सरकारी काज भाषा एवं खस गोर्खाली भाषा के समकक्ष नेपाल में हिंदी भाषा समानांतर दुतीय भाषा का भी अधिकारी है। बिडम्बना यह है कि सिंघ दरवार एवं नशलीय साशकों के गुलामी के चक्कड़ में हमारे मधेश में भी हिंदी भाषा को आज तक भी, सरकारी काज भाषा नहीं बनाया जा सका और यह कमजोड़ी भेदभाव सीधा प्रदेश नीति आयोग का होने से, समय रहते हमारी नीति तथा योजना आयोग, मधेश प्रदेश को हिंदी भाषा के अधिकार हेतु कर्तव्य का निर्बहन करते हुए समबेदनशील सजक होते हुए आगे बड़े बर्ना अत्यंत देर हो जाएगी एवं इतिहास इनलोगों के चाकड़ी चापलूसी को कभी माफ नहीं करेगी एवं इतिहास में ये लोग शाशक के गुलाम एवं चाकड़ कहे जायेंगें।
कृपया आप अधिकार प्राप्त लोग जयचंद मिर्जाफर कहे जाने से अपने को बचायेंगे इशी उम्मीद के साथ यह खूला पत्र प्रस्तुत है ..
धन्यवाद ..
साँभारः व्यक्तिगत फेसबुक
