जलेश्वरटुडे समाचारदाता
भारत, ४ आसिन
नेपाल- भारत अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगोष्ठी एवं स्वरचित कविता प्रतियोगिता शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम 19 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के सुरजीत सिंह भवन में बहुआयामी सांस्कृतिक संरक्षण केंद्र नेपाल के अध्यक्ष डॉ. वीर बहादुर महतो जी की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न किया गया।नेपाल भारत अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगोष्ठी के पहले सत्र का संचालन शोधार्थी मनीषा मौर्या ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए स्थान ग्रहण करने का अनुरोध किया और समस्त आए वक्ता और काव्य पाठ प्रतियोगिता हेतु समस्त विद्यार्थियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. वीर बहादुर महतो जी ने संचालन का कार्य भार संभाला और इस कार्यक्रम के विषय नेपाल- भारत अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगोष्ठी के विषय पर अपनी बात प्रस्तुत की और नेपाल भारत की संस्कृति और लोकभाषा के बारे में बताया, उसकी बलियो के बारे में और नेपाल और भारत के संबंध रोटी- बेटी के बारे में भी बताया। अतिथि की कड़ी में इस कार्यक्रम के पहले अतिथि रोशन जीतून जी मॉरीशस से आए(साकेत के सदस्य) और एक समाजसेवी तथा बिजनेसमैन है। जिन्होंने पहली बार दिल्ली (भारत) की यात्रा की और उन्होंने अपने अनुभव सांझा किएं, वह दिल्ली और भारत से बहुत कुछ सीखने और समझने आए हैं। डॉ. विजय वर्मा (दयाल सिंह कॉलेज) पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर हैं।इन्होंने नेपाल की संस्कृति और राजनीतिक पहलू के विषय पर चर्चा की, नेपाल को एक अच्छा पड़ोसी देश बताते हुए समतामूलक समाज की बात की और वर्तमान में नेपाल के मुद्दों की चर्चाकी। डॉ. दिलीप कुमारजीजो एक अर्थशास्त्री हैं उन्होंने भी नेपाल की सभ्यता और संस्कृति के बारे में बताते हुए नेपाल की जनसंख्या, लिंगानुपात महिलाओं पर पुरुषों की संख्या साक्षरता दर, धर्म इत्यादि विषयों पर चर्चा की और उन्होंने नेपाल की गरिमा को बताते हुए यह कहा कि नेपाल एक ऐसा देश है जो कभी गुलाम नहीं हुआ। 65% लोग आज भी नेपाल में कृषि पर आधारित है तथा वहां के लोगों की स्थिति के बारे में विस्तार रूप से जानकारी प्रदान की। उन्होंने यह भी बताया कि 98% किसान आज भी सिर्फ कृषि को ही अपने जीविका का साधन मानते हैं।डॉक्टर उदयवीर सिंह“वीदपीपुल संस्था” से जुड़े हुए हैं,पेशेसे डॉक्टर हैं और इन्होंने स्वयं के व्यक्तित्व एवं उसकी पहचान पर बात की, व्यक्तित्व विकास के संदर्भ में चर्चा की और बुद्ध का नेपाल में जन्मऔरबुद्ध जैसे महापुरुषइत्यादि विषयों पर बात की।श्री सुरेंद्र कुशवाहा वरिष्ठ समाजसेवी है। जिन्होंने नेपाल की संस्कृति के बारे में चर्चा करते हुए समाज और समाज के लोगों के बारे में बात की। सबके साथ और सब की सहयोग की बात करते हुए सबके विकास की बात की।संजय भाई (बिहार वेलफेयर सोसाइटी)ने वर्तमान में चल रहे नेपाल के आक्रोश के विषय पर चर्चा करते हुए उसे पर एक व्याख्यान दिया, डॉक्टर जयकरण देश और समाज की विकास के लिए एक साथ होकर समानताको लेकर कार्य करने की बात कही। शिवपूजन सहाय “कृषिवाहा समाज”से उन्होंने समाज में अपने स्थान और हक के लिए ताकतवर होने की बात की। चंद्रगुप्त मौर्य (वकील)नेपाल भारत संस्कृति के विषय में बात करते हैं। डॉक्टर हरिशंकर मौर्यकहते हैं कि सर्वप्रथम स्वयं पर काम करने की आवश्यकता है तत्पश्चात समाज और देश के लिए कुछ कर सकेंगे। भगवान बुद्ध के मध्यम मार्ग की बात करते हुए उनके बताए गए राह पर चलने को कहते हैं।सभी वक्ताओं के वक्तव्य के बाद दूसरा सत्र“काव्य पाठ प्रतियोगिता” की शुरुआत होती है जिसका संचालन शोधार्थी दीपशिखा करती हैं।काफी पाठ के निर्णायक मंडल मेंडॉ. विजय वर्मा, डॉ. दिलीप कुमार और श्री सुरेंद्र कुशवाहा जी शामिल थे।काव्य पाठ प्रतियोगिता की शुरुआत डॉ. युवराजके द्वारा की जाती है।जो एक शिक्षक हैं और इन्हें 2012 का “साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है।उसके बाद काव्य पाठ में आए विद्यार्थी अपनी- अपनी कविताओं के माध्यम से समाज के किसी न किसी संदर्भ को संबोधित करते हैं।और सभी विद्यार्थियों की कविताओं का विषय प्रासंगिक एवं सराहनीय थे।काव्य पाठ में दीपशिखा प्रथम,गीता कुमारी द्वितीय एवं अंशु कैन और अनूप यादव तृतीय स्थान पर आते हैं।काव्य पाठ में सभी विद्यार्थियों की कविताएं उत्साहवर्धक एवं शानदार थी।अनूप यादव(स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज), दिव्य लुणावत (स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज), गीता कुमारी (दयाल सिंह कॉलेज), अमृता सिंह (कमला नेहरू कॉलेज), खुशी कैन (शहीद राजगुरू कॉलेज ),दीपशिखा(शोधार्थी, दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. युवराज (शिक्षक)इन सभी लोगों ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया।इशिका चौधरी, विद्या भारती, मो. अमीरुद्दीन, मनीषा मौर्या,दीपशिखा, चंदन, इनका आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका रही।मीडिया से हितेंद्रजी (क्लाउड नेटवर्कन्यूज़) ने भी एक प्रमुख भूमिका निभाई।

