संरक्षणक संकल्प कि राजनीतिक प्रदर्शन ? “जनकपुरमे डोजरक राजनीति” – Jaleshwortoday

संरक्षणक संकल्प कि राजनीतिक प्रदर्शन ? “जनकपुरमे डोजरक राजनीति”

 July 27, 2026  
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✍️ मुरली मनोहर मिश्र,
(जनकपुर नागरिक समाज, जनकपुरधाम–४, धनुषा, नेपाल)

जनकपुरधाम केवल एकटा शहर मात्र नैइ, मिथिलाक आस्था, संस्कृति, इतिहास आ सभ्यताक जीवित प्रतीक अछि। एतक प्रत्येक पोखरि, मठ, मन्दिर, गुठीक जग्गा आ सार्वजनिक सम्पत्ति केवल भौतिक संरचना मात्र नैइ, बल्कि हजारौँ वर्षक सांस्कृतिक धरोहर अछि। एहने पृष्ठभूमिमे प्रधानमन्त्री बालेन शाहद्वारा मन्त्रिपरिषद्क बैठकसभमे बेर-बेर यी प्रश्न उठाएल गेल जे “जनकपुरमे कहियासँ डोजर चलत ?”यी निश्चित रूपसँ चर्चाक विषय अछि। प्रश्न केवल डोजर चलबाक नैइ अछि, बल्कि यी अछि जे संरक्षणक उद्देश्य कतेक निष्पक्ष, कानूनी आ दीर्घकालीन अछि, आ कतेक राजनीतिक सन्देश देबाक प्रयास ?

प्रधानमन्त्री बालेन शाह जनकपुरधाममे अपन सभासँ घोषणा केने छलाह जे जकाँ काठमाडौँमे मन्दिर, पाटी, पौवा आ पोखरी बचाओल गेल, तहिना जनकपुरक धरोहर सेहो बचाओल जाएत। यदि यी प्रतिबद्धता वास्तविक संरक्षणक भावना सँ प्रेरित अछि, तँ निश्चित रूपसँ स्वागतयोग्य अछि। जनकपुरक गुठीक हजारौँ कठ्ठा जग्गा वर्षौँसँ अतिक्रमणक चपेटामे अछि। अनेक पोखरिक अस्तित्व संकटमे अछि। सार्वजनिक सम्पत्तिक संरक्षण राज्यक संवैधानिक दायित्व अछि।

मुदा एतय किछु गम्भीर प्रश्न सेहो ठाढ़ होइत अछि।
पहिल प्रश्न जे, की केवल डोजर चलाएलासँ समस्या समाप्त भ’ जाएत ?

अतिक्रमण एक दिनमे नैइ भेल। दशकोँसँ राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक उदासीनता, गुठी संस्थानक कमजोरी आ स्थानीय तहक निष्क्रियतासँ यी अवस्था बनल। जँ समस्या सामूहिक विफलतासँ उत्पन्न भेल अछि, तँ समाधान सेहो केवल बल प्रयोगसँ सम्भव नैइ । कानूनसम्मत प्रक्रिया, नापजाँच, अभिलेख, अदालती प्रक्रिया आ प्रभावित पक्षक सुनुवाइ सेहो लोकतन्त्रक अनिवार्य आधार अछि।

दोसर प्रश्न जे, की सम्पूर्ण नेपालमे सार्वजनिक अतिक्रमण समान रूपसँ हटत कि केवल जनकपुर राजनीतिक प्राथमिकता बनत ?

यदि प्रधानमन्त्री वास्तवमे सार्वजनिक सम्पत्तिक संरक्षण चाहैत छथि, तँ काठमाडौँ, पोखरा, विराटनगर, नेपालगञ्ज, लुम्बिनी, भक्तपुर, पाटन, धरान सहित सम्पूर्ण देशमे एकर समान नीति लागू होय। केवल जनकपुरकेँ प्रतीकात्मक अभियान बना देला सँ राजनीतिक सन्देश तँ जाएत, मुदा न्यायसङ्गत शासनक भावना कमजोर पड़ि सकैत अछि।

तेसर प्रश्न जे, की अतिक्रमणकारी सभ समान छथि ?

जनकपुरमे कतेको स्थानपर प्रभावशाली व्यक्ति, व्यापारी, राजनीतिक दलसँ जुड़ल लोक आ संस्थागत अतिक्रमण सेहो अछि, तँ दोसर दिस किछु गरीब परिवार वर्षौँसँ बसोबास करैत छथि। कानूनक दृष्टिमे अतिक्रमण स्वीकार्य नैइ, मुदा कार्यान्वयनमे मानवीय संवेदनशीलता, पुनर्वासक नीति आ समान व्यवहार आवश्यक अछि। गरीबक झोपड़ी पर डोजर चलि जाए आ प्रभावशालीक महल सुरक्षित रहि जाए, तँ यी संरक्षण नैइ, अन्याय कहल जाएत।

एहि प्रकरणमे भूमि व्यवस्था मन्त्रालयद्वारा सात दिनक सूचना जारी कयल गेल, मुदा समयसीमा समाप्त भेलाक बादो स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक नैइ भेल। गुठी प्रशासकक सरुवा, प्रशासनिक समन्वयक अभाव आ निर्णय प्रक्रियामे ढिलाइ सँ स्पष्ट होइत अछि जे केवल राजनीतिक इच्छा पर्याप्त नैइ, प्रशासनिक तयारी सेहो आवश्यक अछि।

एतय स्थानीय सरकार आ मधेश प्रदेश सरकारक भूमिका सेहो महत्त्वपूर्ण अछि। यदि संघ, प्रदेश आ स्थानीय तह परस्पर आरोप-प्रत्यारोपमे समय बितौत, तँ जनकपुरक धरोहरक क्षति मात्र बढ़त।

वास्तविक आवश्यकता यी अछि जे—

क) सम्पूर्ण गुठीक जग्गाक डिजिटल अभिलेख सार्वजनिक हो।

ख) नापी, मालपोत, गुठी आ स्थानीय तहक संयुक्त तथ्याङ्क एकीकृत कयल जाए।

ग) राजनीतिक पहुँच वा आर्थिक प्रभावक आधारपर कोनो भेदभाव नैइ होय।

घ) वैध पुनर्वास आवश्यक भेलासँ पहिले नीति तय होय।

ङ) अतिक्रमण हटेबाक बाद पुनः अतिक्रमण नैइ होय, तकर स्थायी संयन्त्र बनाओल जाए।

च) पोखरी, मठ, मन्दिर आ सार्वजनिक सम्पत्तिक संरक्षणमे स्थानीय नागरिक समाज, धार्मिक संस्था आ विशेषज्ञसभकेँ सहभागी बनाओल जाए।

जनकपुरकेँ “नीट एण्ड क्लिन” बनाबयक सपना अवश्य सराहनीय अछि। मुदा स्वच्छता केवल डोजर सँ नैइ, सुशासन, पारदर्शिता, कानूनी समानता आ सांस्कृतिक सम्मान सँ आबैत अछि।

अन्ततः प्रश्न यी नैइ अछि जे डोजर कहिया चलत। वास्तविक प्रश्न यी अछि जे डोजर न्यायक आधारपर चलत कि राजनीतिक प्रदर्शनक आधारपर ?

यदि अभियान निष्पक्ष, कानूनी, पारदर्शी आ सम्पूर्ण अतिक्रमणकारीपर समान रूपसँ लागू होइत अछि, तँ इतिहास एकरा जनकपुरक धरोहर संरक्षणक स्वर्णिम अध्याय मानत। मुदा यदि यी अभियान चयनात्मक, राजनीतिक वा प्रचारमुखी बनि जाएत, तँ डोजर केवल संरचना नैइ, राज्यप्रति नागरिकक विश्वास सेहो भाङ्गि सकैत अछि।