“जनकपुरधामक शिक्षा क्षेत्र”
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✍️ मुरली मनोहर मिश्र,
(जनकपुर नागरिक समाज, जनकपुरधाम–४, धनुषा, नेपाल)
परम आदरणीय संस्कृति-अनुरागी महानुभाव,
🙏🚩प्रभातकालिन जय-जय सीयाराम🙏🚩
जनकपुरधाम शिक्षा, धर्म, संस्कृति आ सभ्यताक प्राचीन केन्द्र रहल अछि। मुदा वर्तमान समयमे शिक्षा क्षेत्र राजनीतिक प्रभाव, नीतिगत अन्योल, प्रशासनिक कमजोरी आ निजी–सामुदायिक विद्यालयक असन्तुलित प्रतिस्पर्धाक कारण गम्भीर चुनौतीक सामना कऽ रहल अछि। प्रस्तुत विषय एहि संकटक अनेक पक्ष सामने आनैत अछि। एहि आधार पर किछु महत्वपूर्ण प्रश्न उठैत अछि जे की स्थानीय सरकार शिक्षा क्षेत्रमे सन्तुलित भूमिका निभा रहल अछि ? की निजी विद्यालयकेँ केवल नियमनक विषय मानल जा रहल अछि अथवा विकासक साझेदार सेहो ?
सबसँ पहिने यी बुझब आवश्यक अछि जे शिक्षा क्षेत्रमे निजी आ सामुदायिक विद्यालय दुनू लोकतान्त्रिक शिक्षाप्रणालीक अभिन्न अंग छथि। निजी विद्यालय रोजगार सृजन करैत अछि, कर तिरैत अछि, आधुनिक शैक्षिक वातावरण उपलब्ध करबैत अछि तथा सरकारी संयन्त्र पर भार सेहो घटबैत अछि। दोसर दिस, सामुदायिक विद्यालय राज्यक सामाजिक दायित्व पूरा करैत अछि। तें दुन्नूकेँ प्रतिस्पर्धी नैइ, पूरक मानल जाए।
विषय मे उल्लेखित तथ्य यदि यथार्थपरक अछि, तँ शैक्षिक सत्र प्रारम्भमे अनावश्यक ढिलाइ, भ्रमपूर्ण सूचनाक समय पर खण्डन नैइ होयब, तथा स्थानीय तहक स्पष्ट नेतृत्वक अभावसँ निजी विद्यालयक विद्यार्थी संख्या घटल होयत। शिक्षा जेकाँ संवेदनशील क्षेत्रमे अनिश्चितता स्वयं अभिभावककेँ चिन्तित बनबैत अछि। जखन सरकारक सन्देश स्पष्ट नैइ होइत अछि, तखन अफवाह नीति पर भारी पड़ि जाइत अछि।
दोसर महत्वपूर्ण विषय अछि जे अनुगमन। विद्यालयक अनुगमन आवश्यक अछि, कारण शिक्षा गुणस्तर सुनिश्चित करब सरकारक कर्तव्य अछि। मुदा यदि अनुगमन निष्पक्ष, पारदर्शी, समान मापदण्डयुक्त आ सुधारमुखी नैइ भऽ कऽ केवल दबाब वा दण्डक माध्यम बनि जाए, तँ ओकर उद्देश्य विफल भऽ जाइत अछि। नियमन आ उत्पीडनक बीचक अन्तर स्थानीय प्रशासनकेँ बुझब आवश्यक अछि।
एहि सन्दर्भ मे सामुदायिक विद्यालयमे विद्यार्थी संख्या अत्यधिक बढ़बाक आ कक्षामे निर्धारित मापदण्डसँ बेसी विद्यार्थी राखबाक प्रश्न सेहो उठाओल गेल अछि। यदि यी अवस्था सत्य अछि, तँ यी सेहो शिक्षा व्यवस्थापनक चुनौती अछि। कानूनक पालन निजी विद्यालय पर मात्र नैइ, सामुदायिक विद्यालय पर सेहो समान रूपेँ लागू होमय। समान मापदण्ड बिना स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सम्भव नैइ भ सकैत अछी ।
तथापि, प्रसंग किछु निष्कर्ष एहन छथि जेकरा सन्तुलित दृष्टिसँ देखबाक आवश्यकता अछि। निजी विद्यालयमे विद्यार्थी घटबाक कारण केवल स्थानीय सरकार नैइ भ सकैत अछि। अभिभावकक आर्थिक अवस्था, निजी विद्यालयक शुल्क संरचना, शिक्षण गुणस्तर, शिक्षक स्थायित्व, विद्यालय व्यवस्थापन, विद्यार्थी परिणाम, तथा सामाजिक धारणा सेहो महत्वपूर्ण कारण भ सकैत अछि। तें सम्पूर्ण जिम्मेवारी एक पक्ष पर देब विश्लेषणकेँ कमजोर बना सकैत अछि।
जनकपुरधाम उपमहानगरपालिकासँ अपेक्षा रहैत जे ओ केवल नियमनमे सीमित नैइ रहि नवप्रवर्तनक कार्यक्रम सेहो सञ्चालन करय। शिक्षक प्रशिक्षण, प्रधानाध्यापक नेतृत्व विकास, डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सम्बन्धी अभिमुखीकरण, उत्कृष्ट विद्यालय सम्मान, अनुसन्धान तथा नवाचार कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्रकेँ दीर्घकालीन लाभ पहुँचा सकैत अछि। स्थानीय सरकार यदि निजी आ सामुदायिक विद्यालय दुनूकेँ साझेदार बना कऽ आगाँ बढ़ैत अछि तँ सम्पूर्ण नगरक शैक्षिक स्तर उन्नत भऽ सकैत अछि।
दोसर दिस निजी विद्यालय सञ्चालकसभकेँ सेहो आत्ममूल्याङ्कन करबाक आवश्यकता अछि। केवल सरकारी नीतिक आलोचना पर्याप्त नैइ। पारदर्शी शुल्क प्रणाली, योग्य शिक्षक, अभिभावकसँ नियमित संवाद, आधुनिक शिक्षण पद्धति, नैतिक प्रशासन आ सामाजिक उत्तरदायित्व अपनाए बिना दीर्घकालीन विश्वास निर्माण कठिन रहत।
जनकपुरधामक शिक्षा क्षेत्रकेँ राजनीतिक प्रतिस्पर्धाक माध्यम नैइ, मानव संसाधन निर्माणक आधार मानल जाए। शिक्षा क्षेत्रमे अस्थिरता अन्ततः विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक आ सम्पूर्ण समाजक क्षति करैत अछि। स्थानीय सरकार, निजी विद्यालय, सामुदायिक विद्यालय, अभिभावक तथा नागरिक समाज यी सभ पक्षकेँ संवाद, सहकार्य आ साझा उत्तरदायित्वक आधार पर आगाँ बढ़ब आवश्यक अछि।
निष्कर्षतः प्रस्तुत विचार शिक्षा क्षेत्रमे उठि रहल चिन्तासभकेँ उजागर करैत अछि, मुदा समाधान आरोप-प्रत्यारोपमे नैइ, सन्तुलित, पारदर्शी, लगानीमैत्री तथा विद्यार्थी-केन्द्रित शिक्षा नीतिमे निहित अछि। जनकपुरधाम जँ वास्तवमे शिक्षाक केन्द्र बनय चाहैत अछि, तँ निजी विद्यालयकेँ शत्रु नैइ, विकासक सहयात्री मानि समान अवसर, स्पष्ट नीति, निष्पक्ष नियमन आ दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान करब समयक प्रमुख आवश्यकता अछि। तखने शिक्षा क्षेत्र सुरक्षित, विश्वसनीय आ भविष्यउन्मुख बनि सकत, हँ कि नैइ…
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