मुरली मनोहर मिश्र
जनकपुरधाम, २९ असार
जनकपुरधाम उपमहानगरपालिकाक १५म् नगरसभामे आर्थिक वर्ष २०८३/०८४ लेल करिब २ अर्ब ६५ करोड रुपैयाँसँ बेसीक बजेट प्रस्तुत कयल गेल। बजेटमे विकास, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पूर्वाधार, सरसफाइ, कृषि, खेलकुद, रोजगार तथा शहरी उत्थानशीलताके प्राथमिकता देल गेल अछि। सिद्धान्ततः यी सकारात्मक दिशा अवश्य अछि, मुदा लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्थामे केवल बजेट घोषणा पर्याप्त नैइ होइत अछि। बजेटक सफलता कार्यान्वयन, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व आ नागरिक सन्तुष्टिसँ मापल जाइत अछि।
१. विगतक बजेटसँ की सीखल गेल ?
जनकपुरधाम उपमहानगरपालिकामे विगत किछु वर्षसँ लगभग समान प्रकृतिके प्राथमिकता दोहराइत आबि रहल अछि, जेनाकि सरसफाइ, पर्यटन, सडक, शिक्षा, स्वास्थ्य, सौन्दर्यीकरण, कृषि तथा रोजगार। मुदा नागरिकक अनुभव बतबैत अछि जे घोषणा आ धरातलक उपलब्धिमे उल्लेखनीय अन्तर रहल अछि। नगरक अधिकांश सडक वर्षामे जलमग्न भऽ जाइत अछि। नालाक नियमित सफाइ नैइ होइत अछि। सार्वजनिक स्थानसभ पर अतिक्रमण निरन्तर बढ़ि रहल अछि। धार्मिक आ सांस्कृतिक सम्पदासभक संरक्षण अपेक्षित गतिसँ नहि भऽ सकल अछि। यी प्रश्न स्वाभाविक अछि जे यदि विगतक योजनाक प्रभाव सीमित रहल, तँ एहि वर्ष परिणाम कोना बदलत ?
२. आन्तरिक आय: लक्ष्य यथार्थवादी कि महत्वाकांक्षी ?
उपमहानगरपालिकाले २० करोड रुपैयाँ आन्तरिक आय संकलनक लक्ष्य राखने अछि। यी स्वागतयोग्य उद्देश्य अवश्य अछि, मुदा लक्ष्यसँ बेसी महत्वपूर्ण अछि—राजस्व संकलनक नीति।
कर आधार विस्तार, कर चुहावट नियन्त्रण, डिजिटल कर प्रणाली, सम्पत्ति अभिलेख अद्यावधिक, व्यवसाय दर्ता तथा करदाताक विश्वास निर्माण बिना आन्तरिक आयमे उल्लेखनीय वृद्धि कठिन अछि। यदि करदाताके सेवा सुधारल नैइ जाए, तँ कर संकलन बढाबयमे चुनौती रहत।
३. पर्यटन: नारासँ नीति धरि,
जनकपुरधाम नेपालक प्रमुख धार्मिक नगरीमे सँ एक अछि। मुदा पर्यटन विकास केवल मन्दिरक प्रचारसँ नैइ होइत अछि।
पर्यटक स्वच्छ सडक, व्यवस्थित यातायात, सुरक्षित पदमार्ग, स्वच्छ पोखरि, सूचना केन्द्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हरियाली, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय तथा ऐतिहासिक सम्पदाक संरक्षण सेहो चाहैत छथि।
यदि जानकी मन्दिर, जानकी फूलबारी, गंगासागर, धनुषसागर, ५२ कुटी, ७२ कुण्ड, गुठी सम्पत्ति तथा मिथिला सांस्कृतिक सम्पदाके एकीकृत संरक्षण योजना नैइ बनत, तँ पर्यटनक सम्भावना अधूरा रहि जाएत।
४. शहरी विकास कि केवल निर्माण ?
बजेटमे शहरी उत्थानशीलता परियोजनाके विशेष प्राथमिकता देल गेल अछि। मुदा शहरी विकासक अर्थ केवल सडक, भवन आ ढलान निर्माण नैइ होइत अछि।
दिगो नगर ओहि नगरके कहल जाइत अछि जतय,
क) वर्षा जल व्यवस्थापन प्रभावकारी हो,
ख) पैदल यात्रु सुरक्षित होथि,
ग) साइकल मार्ग उपलब्ध होय,
घ) खुला सार्वजनिक क्षेत्र सुरक्षित रहय,
ङ) हरियाली बढय,
च) वातावरणीय प्रभाव कम होय,
छ) दिव्याङ्गमैत्री पूर्वाधार विकसित होय।
यदि विकासक मापदण्ड केवल निर्माणक मात्रा रहत, तँ शहरी गुणस्तरमे अपेक्षित सुधार सम्भव नैइ होएत।
५. सुशासन: सबसँ पैघ चुनौती,
नेपालक स्थानीय तहसभमे सबसँ बेसी आलोचना योजना छनोट, ठेक्का प्रक्रिया, गुणस्तर नियन्त्रण तथा बजेट खर्चक अन्तिम महिनामे अत्यधिक खर्च (असारे विकास) लेल होइत रहल अछि।
जनकपुरधाम सेहो एहि आलोचनासँ अलग नैइ रहल अछि।
अतः एहि वर्ष निम्न विषयमे विशेष सुधार अपेक्षित अछि—
क) सम्पूर्ण बजेट विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराओल जाए।
ख) प्रत्येक योजनाक प्रगति मासिक रूपमा सार्वजनिक कयल जाए।
ग) सामाजिक परीक्षण अनिवार्य बनाओल जाए।
घ) उपभोक्ता समितिक पारदर्शी चयन होय।
ङ) गुणस्तर परीक्षण स्वतन्त्र निकायसँ कराओल जाए।
च) नागरिक गुनासो व्यवस्थाके प्रभावकारी बनाओल जाए।
६. जनकपुरधामक वास्तविक प्राथमिकता की होयबाक चाही ?
यदि दीर्घकालीन विकास लक्ष्य अछि, तँ निम्न क्षेत्रसभमे विशेष लगानी आवश्यक अछि—
क) गुठी जग्गा तथा धार्मिक सम्पदाक संरक्षण।
ख) पोखरि, कुण्ड तथा जलाशय पुनर्जीवन।
ग) आधुनिक फोहोर व्यवस्थापन प्रणाली।
घ) भूमिगत ढल तथा वर्षा जल निकास।
ङ) डिजिटल नगरपालिका सेवा।
च) सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्र सुदृढीकरण।
ज) निजी क्षेत्रसँ साझेदारीमार्फत रोजगार सृजना।
झ) मिथिला संस्कृति, भाषा तथा कलाक आर्थिक उपयोग।
त) नगरभरिक अतिक्रमण नियन्त्रण।
थ) . जलवायु परिवर्तन अनुकूल शहरी योजना।
७. नीतिगत १५ सुझाव:
७-१. पाँच वर्षक स्पष्ट शहरी मास्टर प्लान सार्वजनिक कयल जाए।
७-२. सम्पूर्ण बजेटक GIS आधारित निगरानी प्रणाली लागू होय।
७-३. प्रत्येक वडा लेल वार्षिक कार्यसम्पादन सूचकाङ्क तय होय।
७-४. जनप्रतिनिधि तथा कर्मचारीक उत्तरदायित्व मूल्याङ्कन सार्वजनिक होय।
७-५. खुला तथ्याङ्क (Open Data) प्रणाली लागू होय।
७-६. सम्पूर्ण ठेक्का प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल बनाओल जाए।
७-७. सार्वजनिक सुनुवाइ नियमित कयल जाए।
७-८. नगर गौरव आयोजनासभक स्वतन्त्र प्राविधिक परीक्षण होय।
७-९. धार्मिक पर्यटन विकास प्राधिकरण गठन पर पहल होय।
७-१०. हरित जनकपुर अभियान सञ्चालन होय।
७-११. युवा उद्यम कोष स्थापना होय।
७-१२. महिला स्वरोजगार कार्यक्रम विस्तार होय।
७-१३. नगर अनुसन्धान तथा नीति अध्ययन केन्द्र स्थापना होय।
७-१४. नागरिक समाज, विश्वविद्यालय तथा विशेषज्ञसभके नीति निर्माणमे सहभागी बनाओल जाए।
७-१५. प्रत्येक वर्ष बजेट उपलब्धिक स्वतन्त्र मूल्याङ्कन प्रतिवेदन सार्वजनिक कयल जाए।
८. अन्तिम-निष्कर्ष:
१५म् नगरसभासँ प्रस्तुत बजेट जनकपुरधाम लेल एकटा महत्वपूर्ण अवसर अवश्य प्रदान करैत अछि। मुदा विकासक वास्तविक परीक्षा बजेट पारित होएब नैइ, बल्कि समय पर गुणस्तरीय कार्य सम्पन्न होएब, सार्वजनिक धनक सदुपयोग, पारदर्शिता, सांस्कृतिक सम्पदाक संरक्षण तथा नागरिक जीवनमे प्रत्यक्ष सुधारसँ होयत।
यदि घोषणा व्यवहारमे बदलैत अछि, तँ जनकपुरधाम वास्तवमे धार्मिक राजधानीक संग-संग सुशासित, स्वच्छ, समावेशी आ दिगो आधुनिक नगरक रूपमे स्थापित भऽ सकैत अछि। अन्यथा यी बजेट सेहो विगतक बजेटसभ जकाँ कागजक सफलतामे सीमित रहि जाएत।
लोकतन्त्रमे बजेट सरकारक दस्तावेज मात्र नैइ, नागरिकसभसँ कयल गेल सार्वजनिक वचन होइत अछि। एहि वचनक विश्वसनीयता आब कार्यान्वयन पर निर्भर करैत अछि ।
