स्थानीय पाठ्यक्रमसँ स्थानीय चेतनाधरि – Jaleshwortoday

स्थानीय पाठ्यक्रमसँ स्थानीय चेतनाधरि

 July 14, 2026  
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मुरली मनोहर मिश्र
जनकपुरधाम, २९ असार

जनकपुरधाम उपमहानगरपालिकाद्वारा कक्षा १ सँ ३ धरि “अप्पन जनकपुरधाम” नामक मैथिली भाषाक स्थानीय पाठ्यपुस्तक सार्वजनिक कएनाइ मधेश प्रदेश आ सम्पूर्ण मिथिलाक शिक्षा इतिहासमे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानल जा सकैत अछि । यी पहल केवल पाठ्यपुस्तक प्रकाशन नैइ, बल्कि संविधानद्वारा सुनिश्चित मातृभाषामे शिक्षाक अधिकार, स्थानीय ज्ञानक संरक्षण तथा सांस्कृतिक पहिचानकेँ विद्यालयी शिक्षासँ जोड़बाक प्रयास अछि ।
मुदा, शिक्षा विशेषज्ञसभक अनुसार कोनो पाठ्यपुस्तक तखने सफल मानल जाइत अछि, जखन ओ बालकक व्यवहार, सोच, चरित्र आ समाजप्रतिक उत्तरदायित्वमे सकारात्मक परिवर्तन आनय। तें प्रश्न उठैत अछि जे की æअप्पन जनकपुरधामæ केवल पढबाक पुस्तक रहत, कि जनकपुरधामकेँ चिन्हबाक, बुझबाक आ बचाबयक अभियान सेहो बनत ?
आइ जनकपुरधाम अनेक चुनौतीसँ जूझि रहल अछि। ऐतिहासिक पोखरि, सार्वजनिक जग्गा, मठ–मन्दिर, कुटी, धर्मशाला, हरित क्षेत्र तथा सांस्कृतिक सम्पदापर अतिक्रमणक आरोप लगातार उठैत रहल अछि। फोहोर व्यवस्थापन, अव्यवस्थित सहरीकरण, ट्राफिक समस्या, प्रदूषण, सार्वजनिक शिक्षाक कमजोर अवस्था, निजी विद्यालयसभक बढैत प्रभाव तथा सरकारी विद्यालयप्रति घटैत विश्वास सेहो गम्भीर विषय अछि ।
यदि बालबालिका पुस्तकमे स्वच्छ जनकपुर, सांस्कृतिक सम्पदा संरक्षण आ नागरिक कर्तव्य पढ़ैत अछि, मुदा विद्यालयसँ बाहर निकलैते फोहोर, अव्यवस्था, अतिक्रमण आ लापरवाही देखैत अछि, तँ शिक्षाक नैतिक प्रभाव कमजोर पडÞि जाइत अछि। तें स्थानीय पाठ्यक्रमकेँ व्यवहारिक नागरिक शिक्षासँ जोड़ब समयक माँग अछि । एहि पाठ्यपुस्तकमे जनकपुरधामक इतिहास, माता जानकीक जीवन, मिथिला सभ्यता, लोकसंस्कृति, मैथिली भाषा, लोकगीत, लोकपर्व, मिथिला चित्रकला, जलाशय, धार्मिक सहिष्णुता, प्राकृतिक सम्पदा, पर्यावरण संरक्षण, संविधानमे नागरिक अधिकार तथा कर्तव्य, स्थानीय सरकारक भूमिका, कर तिरबाक संस्कार, सार्वजनिक सम्पदाक संरक्षण, महिला सम्मान, सामाजिक सद्भाव तथा वैज्ञानिक सोच जेकाँ विषयसभकेँ प्राथमिकतासँ समावेश करबाक आवश्यकता अछि । शिक्षाक उद्देश्य केवल परीक्षा पास करेनाइ नैइ, बल्कि जिम्मेवार नागरिक तैयार करेनाइ होइत अछि। यदि æअप्पन जनकपुरधामæ पढÞि निकलल पीढ़ी अपन शहरकेँ स्वच्छ, अनुशासित, सांस्कृतिक रूपसँ समृद्ध तथा अतिक्रमणमुक्त बनाबय लेल प्रेरित होइत अछि, तँ यी पाठ्यपुस्तक वास्तवमे सफल कहल जाएत ।
दोसर महत्वपूर्ण चुनौती शिक्षक तयारीक अछि। यदि शिक्षक स्वयं मैथिली भाषामे प्रभावकारी शिक्षणक प्रशिक्षण नैइ लेने छथि, तँ उत्कृष्ट पाठ्यपुस्तक सेहो अपेक्षित परिणाम नैइ देत। तें नियमित शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षण सामग्री, डिजिटल सामग्री, अडियो–भिडियो सामग्री तथा स्थानीय अनुसन्धानकेँ पाठ्यक्रमसँ जोड़ब अनिवार्य अछि ।
नगरपालिकाक शिक्षा नीति केवल कक्षा १–३ धरि सीमित नैइ रहबाक चाही । क्रमशः कक्षा ४ सँ १२ धरि स्थानीय इतिहास, मिथिला दर्शन, कृषि, जल संरक्षण, लोकविज्ञान, पर्यटन, उद्यमशीलता तथा नागरिक शिक्षाकेँ समावेश करैत सम्पूर्ण स्थानीय पाठ्यक्रम विकसित करबाक आवश्यकता अछि ।
संगहि, निजी विद्यालयसभमे सेहो स्थानीय पाठ्यक्रमक प्रभावकारी कार्यान्वयन सुनिश्चित होअय। यदि सरकारी विद्यालयमे मात्र यी पुस्तक पढ़ाओल जाए आ निजी विद्यालयसभ अपन अलग व्यवस्था चलबैत रहय, तँ समान शिक्षाक उद्देश्य पूरा नैइ होयत । सबसँ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तरदायित्वक अछि जेः
क) जहि शहरक इतिहास बालककेँ पढ़ाओल जा रहल अछि, की ओहि इतिहासक संरक्षण लेल नगरपालिका स्वयं प्रतिबद्ध अछि ?
ख) की सार्वजनिक सम्पदाक अतिक्रमण हटत ?
ग) की विद्यालय परिसर सुरक्षित, स्वच्छ आ बालमैत्री बनत ?
घ) की पुस्तकमे लिखल मूल्य व्यवहारमे देखाइ पड़त ?
शिक्षा आ शासनक विश्वसनीयता एहि प्रश्नसभक उत्तर पर निर्भर करैत अछि । अन्ततः, æअप्पन जनकपुरधामæ केवल एकटा पाठ्यपुस्तक नैइ, बल्कि भविष्यक नागरिक निर्माणक दस्तावेज अछि ।
यदि यी पहल राजनीतिक प्रचारसँ ऊपर उठि संस्थागत रूप लेत, शिक्षक, अभिभावक, साहित्यकार, इतिहासकार, नागरिक समाज आ सम्पूर्ण समुदाय एकसाथ जुड़त, तँ जनकपुरधाम मातृभाषा– आधारित स्थानीय शिक्षाक राष्ट्रिय नमूना बनि सकैत अछि ।
बालककेँ केवल “अप्पन जनकपुरधाम” पढ़ेबाक नैइ, बल्कि एहन जनकपुरधाम दियौ, जाहिपर ओ गर्वसँ कहि सकय æयी हमर शहर, हमर संस्कृति आ हमर भविष्य अछि ।